हाई ब्लड प्रेशर के लिए योग
हाई ब्लड प्रेशर ( उक्त
रक्तचाप ) की बीमारी किसी को भी हो सकती है | इसके मरीज बहुत बड़ते जा रहे है | हाई
ब्लड प्रेशर ( High Blood Pressure ) को हाईपरटेंशन ( Hypertension ) भी कहा जाता है| ब्ल ड प्रेशर की बीमारी गलत जीवनशेली की वजह से हो जाती है | अधिक
मिर्च मसाले खाना, व्यायाम नहीं करना, अधिक तनाव लेना, यह सब इसके मुख्य कारण है |
ब्लड प्रेशर के मरीजो को योग करना चाहिए | योग करने से मन को शांति मिलती है और ब्लड
प्रेशर कण्ट्रोल में रहता है | ब्लड प्रेशर को कण्ट्रोल में रखने के लिए कुछ योग
इस प्रकार है -
पदमासन (Padmasana)
यह आसन मन को शान्त रखता
है और तनाव को खत्म कर एकाग्रता को बढाता है | यह मेरुदंड और कमर के भाग को मजबूत
बनाता है | रक्तचाप को नियंत्रण में रखता है | ध्यान लगाने के लिए यह बहुत उपयोगी
आसन है | इसे करने के लिए जमीन पर बेठ जाये | अब बाँयें पैर को उठाकर दांयी जांघ
पर रख लें और दांये पैर को उठाकर बाँई जांघ पर रख लें | इस स्थिति में कमर को एकदम
सीधा रखें और फिर दोनों हाथो को दोनों घुटनों पर रखें | इस आसन को 5 से 10 मिनट तक
कर सकते है | शुरू में यह आसन मोटे लोगो को करने में परेशानी होती है मगर अभ्यास
करते रहने से कुछ दिनों बाद आसन हो जाता है |
शवासन (Savasana)
यह आसन बहुत सरल है और इसे
कोई भी कर सकता है | यह आसन शरीर को पूरी तरह से आराम देता है | कम काज से आई थकान
को दूर करता है | नींद न आने की समस्या खत्म होती है | उच्च रक्तचाप और दिल की
बीमारी में बहुत लाभदायक है | इसे करने के लिए पीठ के बल सीधे लेट जाये | दोनों
पैरो के बीच में ठोड़ी दुरी रखें | दोनों हाथो को भी शरीर से थोडा दूर रखे | अब
दोनों आँखों को बंद कर लें | साँस की प्रक्रिया को सामान्य रखें | शरीर को बिल्कुल
भी कड़ा न रखे, उसे ढीला छोड़ दें | इसे 10 से 15 मिनट तक कर सकते है |
कन्धरासन (Kandharasana)
यह आसन धनुरासन की तरह ही
मिलता जुलता है | यह आसन कमर दर्द, कन्धो का दर्द, गले के रोग और घुटनों कर दर्द को दूर रखने में बहुत
मदद करता है | कमर को पतली और छाती को मजबूत बनता है | इस आसन से ब्लड प्रेशर ठीक
रहता है | यह पाचन शक्ति को बढाता है और भूख खुलकर लगती है | कन्धरासन को करने के
लिए सबसे पहले पीठ के बल सीधे लेट जाए | अब अपनी कमर और जांघो को जितना ऊपर उठा
सकते हो ऊँचा उठाएं | दोनों हाथो से पैरो को पकड़ने की कोशिश करें | कुछ सेकंड तक
इसी स्थिति में रहे | फिर धीरे - धीरे अपनी कमर को नीचे लाकर सीधे हो जाये | इस
आसन को 4 से 5
बार तक कर सकते है |
अर्द्ध कुर्मासन ( Ardhkurmasana
)
यह बहुत सरल आसन है और इसके
बहुत लाभ है | इस आसन से पेट साफ न होने की परेशानी खत्म हो जाती है | इसे करने से
पेट खुलकर साफ़ हो जाता है | छोटी और बड़ी आंत, गुर्दे मजबूत क्रियाशील है | रीढ़ की
हड्डी मजबूत बनते है | पैरो और हाथो की मांसपेसियो मजबूत होती है | बहार निकला हुआ
पेट अंदर घुस जाता है | शरीर में रक्त संचार ठीक रहता है | इस आसन को करने के लिए पैरो
को पीछे की ओर मोडकर बेठ जाये | अब दोनों हाथो को ऊपर की ओर करके हाथो को नमस्कार
की तरह मिला ले | अब साँस को खीचते हुये धीरे धीरे कमर के उपरी भाग को एकदम सामने
की ओर ले जाकर माथा और दोनों हाथ जमीन पर मिला दें | फिर साँस को छोड़ते हुए धीरे
धीरे सीधे हो जाये | इस आसन को 10 बार तक कर सकते है |
पश्चिमोत्तानासना ( Paschimottanasana )
यह आसन सभी के लिए फायदेमंद
है | इसे कोई भी कर सकता है | यह मोटापे को कम करता है | इस योग से बड़ा पेट अंदर
हो जाता है | इसको करते रहने से बुढ़ापा जल्दी नहीं आता है और सर्दी, खांसी, कब्ज
नहीं होते है | शरीर स्वस्थ ओर निरोग रहता है | इसे करने के लिए पैरो को सीधा करके
बेठ जाये | अब झुककर अपने दोनों हाथो से पैरो के अंगूठे को पकड़ने की कोशिश करनी
चाहिए |
वज्रासन ( Vajrasana )
यह
आसन पीठ के दर्द और छाती के कष्टों को दूर करता है | इससे ध्यान को एकाग्र करने
में सहायता मिलती है | इसे खाना खाने के बाद भी किया जा सकता है | यह पाचन शक्ति
को बढाता है और खाने को ठीक से हजम कराता है | यह आसन रक्तचाप को सही रखता है |
इसे करने के लिए दोनों पैरो को पीछे की ओर मोडकर पैरो पर बेठ जाएं कमर सीधी रखे और
गर्दन भी सीधी रहनी चाहिए | दोनों हाथो को दोनों घुटनों पर रख लें | शुरू में यह आसन
5 मिनट तक करे | फिर इसे बढ़ाते हुए 15 मिनट तक कर सकते है |
पदहस्तासन (
Padahastasana )
इस आसन से रीढ़, गर्दन,
पसली, कमर और पैर मजबूत बनते है | ब्लड प्रेशर कण्ट्रोल में रहता है | बड़े पेट
वालो के लिए यह आसन बहुत लाभकारी है इससे पेट अंदर हो जाता है | शरीर फुर्तीला
बनता है | इस आसन को करने के लिए सबसे पहले सीधे खड़े हो जाये | दोनों पैरो में
दुरी नहीं होनी चाहिए | अब साँस लेते हुए दोनों हाथो को ऊपर की ले जाए | अब साँस
को छोड़ते हुए दोनों हाथो और कमर को धीरे धीरे आगे की ओर नीचे झुकाते हुए दोनों
हाथो की उंगलियों से पैरो के अंगूठे को पकड़ने की कोशिश करें | ऐसा करते वक्त पैर
मुड़ने नहीं चाहिए | फिर साँस को भीतर खीचते हुए धीरे धीरे ऊपर आ जायें | इस आसन को
दस बार तक कर सकते है |







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