Thursday, 7 June 2018

Shirshasan in Hindi, शीर्षासन


शीर्षासन किसे कहते है (What is Shirshasana) 
शीर्षासन मतलब शीर्ष (सिर) से करने वाला आसन है| इस आसन में पूरे शरीर को सिर के बल उठाया जाता है | यह आसन शुरू में थोडा कठीन लगता है, मगर इसका अभ्यास करते रहने से बाद में बहुत आसन हो जाता है |

शीर्षासन के फायदे (Benefit of Shirshasana) 
शीर्षासन योगासनों में सबसे ज्यादा लाभ देने वाला योग है | इससे करने से शरीर मजबूत बनता है | इससे शरीर मजबूत बनता है और रोगों से लड़ने की शक्ति बढती है | इसके कुछ अन्य फायदे भी है जैसे –

  • इसे करने से बुद्धि का विकास होता है |
  • यह स्मरण शक्ति को बढता है |
  • तनाव को खत्म करता है | 
  • पाचन सम्बन्धी सभी परेशानियाँ दूर होती है | 
  • भूख खुलकर लगती है |
  • शरीर में रक्त संचार सही रहता है | 
  • शरीर फुर्तीला बनता है |
  • इसे करने से बुढ़ापा जल्दी नहीं आता है | 
  • बाल झड़ने बंद हो जाते है | 
  • इसे रोज करते रहने से सिर के सफ़ेद बाल दुबारा काले हो जाते है |
  • इस आसन से नींद न आने की शिकायत खत्म हो जाती है |
  • इससे पेट रोग जैसे कब्ज, अपच दूर होते है | 
  • चेहरे की झुरियां दूर होती है | 

शीर्षासन करने की विधि (Method of Shirshasana)  
सबसे पहले चटाई पर घुटनों को मोड़ कर बेठ जाये | अब अपने सिर को जमीन पर रखकर, अपनी कमर को धीरे – धीरे इतना ऊपर उठायें कि घुटनों तथा पावों में तनाव आ जाए | फिर घुटनों को छाती के समीप लाकर, शरीर का संतुलन साधते हुए अपने पैरो के पंज्जो को उठाकर तथा घुटने मोडकर रखे | शरीर का संतुलन बनाये रखने के लिए कुछ दिनों तक सिर्फ इतना ही अभ्यास करें | जब शरीर का संतुलन बन जाये, तब पीठ तथा नितम्ब की पेशियों को सिकोड़कर, घुटने मुड़े रहते हुए, जांघो को सीधा कर लें | ऐसा करने पर एडियाँ जांघ से मिल जायेंगी | इस अभ्यास को भी कुछ दिनों तक करते रहे | जब इसमें भी सफलता मिल जाये, तब शरीर का पूरी तरह से संतुलन बनाते हुए घुटनों को खोलते हुए धीरे – धीरे पैरो को ऊपर की ओर ले जाये | इसमें शरीर को एकदम सीधा रखे | अब दोनों पैरो को एक साथ खोलकर ऊपर ले जाने से शुरू में शरीर का संतुलन बिगड़ने का भय बना रहता है | इसलिए एक एक पैर को खोलकर ऊपर ले जाने की कोशिश करनी चाहिए | जब इस आसन में निपूर्ण हो जाये तब दोनों पेरो को एक साथ ऊपर ले जाना चाहिए | शुरू में इस आसन को 3 से 5 तक करना चाहिए  | बाद में समय बढ़ाते हुए 30 मिनट तक भी किया जा सकता है | शुरू में इस आसन में संतुलन बनाये रखने के लिए किसी दीवाल का सहारा लिया जा सकता है, मगर बाद में संतुलन बनना सिखनेके बाद इस आसन को बिना किसी सहारे के ही करना चाहिए |

शीर्षासन के लिए सावधानी (Precautions for Shirshasana)  
शीर्षासन योगासनों में सबसे बढ़िया है, मगर यह सबसे कठिन आसन भी है | गलत तरीके से करने पर, इससे नुकसान भी हो सकता है | इसलिए शीर्षासन को किसी अभ्यासी की देख रेख में ही करना चाहिए | किसके देख रेख के बिना इसे करना सही नहीं माना जाता है | गर्भवती महिलाओ को यह आसन नहीं करना चाहिए | निम्न रक्तचाप (Low Blood Pressure ) और उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure ) वाले व्यक्तियों को भी यह आसन नहीं करना चाहिए | अगर काम बहता हो या फिर शरीर पर कोई घाव हो तो भी यह आसन नहीं करना चाहिए | कमजोर दिल वालो को भी यह आसन वर्जित है | खाना खाने के बाद भी यह आसन नहीं करना चाहिए | शीर्षासन करने के तुरंत बाद हवा में नहीं निकला चाहिए | इस आसन को करने के बाद कम से कम एक घंटे तक नहाना भी नहीं चाहिए | 

शीर्षासन के लिए विशेष बातें (Important topic for Shirshasana)   
शीर्षासन का अभ्यास सिद्ध हो जाने पर जितना चाहे उतनी समय तक कर सकते है | इस आसन को कुछ लोग एक घंटे तक करते रहते है मगर इस आसन को 15 – 20 मिनट से ज्यादा नहीं करना चाहिए | शीर्षासन करने के बाद कम से कमे दो मिनट तक ताड़ासन और शवासन करना जरुर चाहिए | ताड़ासन शीर्षासन का विपरीत आसन है, इससे शीर्षासन के कारण आई हुई थकन दूर हो जाती है | शवासन शरीर को पूरी तरह आराम देता है और इसे करने से शीर्षासन की थकान खत्म जो जाती है |    

                 



   

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