अस्थमा के लिए योग
अस्थमा
फेफड़ो में होने वाला रोग है | यह किसी को भी हो सकती है | अस्थमा का रोग बच्चो को
भी हो सकता है | अस्थमा का मरीज बहुत संवेदनशील रहता है | मौसम बदले ने से उनकी
परेशानी और ज्यादा बड जाती है | इस बीमारी का मरीज बहुत ठण्ड सहन नहीं कर पाते है
| धुल और धुँआ से भी उनकी परेशानी बहुत बड जाती है | लोग अस्थमा के ईलाज के लिए
तरह तरह की दवाई खाते है | सूंघने वाली दवाई भी उनको हमेशा अपने पास रखनी पड़ती है
| अगर आप योग करें तो इन सबसे बचा जा सकता है | योग करने से अस्थमा को सही किया जा
सकता है | योग शरीर को मजबूत और निरोग बनाता है | यहाँ में आपको अस्थमा के लिए कुछ
योग बताने जा रहा हूँ |
भुजंगासन
यह
आसन सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण आसन है | यह अनेक प्रकार के रोगों में लाभकारी है | इस
आसन को स्त्री और पुरुष कोई भी कर सकता है | यह दोनों के लिए हितकारी है | इस आसन
से गर्दन, छाती, मुँह और सिर मजबूत बनते है | यह आसन अस्थमा के मरीजो के लिया बहुत
उपयोगी है | यह आसन पेट के लिए भी बहुत
लाभकारी है | यह पेट के अनेक रोगों को दूर करता है | इस आसन को करने के लिए पेट के
बल फर्स पर सीधे लेट जाये | फिर गर्दन और सिर को पीछे की ओर झुकाएं और छाती को को
उपर की ओर झुकाना चाहिए | ऊपर की ओर देखते हुए साँस को रोके रखें | इस तरह 6 से 8 सेकंड तक रहे | फिर धीरे धीरे साँस को छोड़ते हुए सिर
को झुकाएं और फर्स पर पहले की तरह पेट के बल सीधे लेट जाएं | अब शरीर को ढीला
छोड़ते हुए 6 सेकंड तक आराम करे |
इसी तरह से इस आसन को पांच बार तक करना चहिये |
उष्ट्रासन
सेतुबन्धासन
यह
आसन गर्दन, कंधे, बाँहे, पैर, छाती को मजबूत बनाता है | यह खांसी, जुकाम, दमा आदि
रोगों में बहुत लाभदायक है | इस आसन को करने के लिए सबसे पहले पीठ के बल लेटकर जाये
| अब दोनों पैरो को मिलाकर कमर को ऊपर की ओर उठाये | दोनों हाथों से कमर को कसकर
पकड लें | इस आसन को पांच बार तक करना चाहिए |
धनुरासन
इस
आसन के अनेक लाभ है | इस आसन से फफडे मजबूत बनते है | इससे अस्थमा में बहुत फायदा
मिलता है | इस आसन से शरीर में खून का प्रवाह तेज रहता है | यह आसन शरीर के जोड़ो
को सही रखता है | पाचन सम्बन्धित सभी परेशानी खत्म हो जाती है | बड़ा हुआ पेट कम हो
जाता है | शरीर की फालतू चर्बी को कम कर देता है | इस आसन को करने के लिए सबसे
पहले पेट के बल उल्टा लेट जाएं | फिर अपने दोनों पैरो को ऊपर की ओर मोड़े | अब गहरी
साँस लेते हुए अपने दोनों हाथो से पैरो को पकड़े | फिर अपना सिर, गर्दन और छाती को
ऊपर उठाये और साँस को रोखे रखे | इसे पांच सेकंड तक करना चाहिए | इसके बाद धीरे
धीरे साँस को छोड़ते हुए पेट के बल सीधे हो जाये और पांच सेकंड तक आराम करें | पहले
इस आसन को दो बार ही करे | फिर इस आसन को चार बार तक किया जा सकता है |
अर्द्धमत्स्येन्द्रासन
यह
आसन पेट, पीठ, हाथ, पैर, गर्दन, कमर और छाती को बहुत लाभ पहुँचाता है| इस आसन को
करने से युवावस्था बनी रहती है और बुढ़ापा जल्दी नहीं आता है | इस आसन को करने के
लिए दोनों पैरो को फैलाकर बैठ जाएं | फिर बाँयें पैर को मोडकर दाँयें पैर के बाहर,
जांघ से सटकर रखे और दाँये पैर को मोड़कर, अपनी गुदा के नीचे रखे | अब बाँए घुटने
की टेक लगाते हुए, दांये कंधे को अड़ाकर, दांये हाथ से बांये पैर का अंगूठा पकड़े और
बांये हाथ को पीठे के पीछे की ओर घुमाकर रखे | सिर को बांयी ओर ठोड़ी तथा कंधे की
सीध में और छाती को तना हुआ सीधा रखना चहिये |
ताड़ासन
यह
आसन छाती के रोग के लिए बहुत लाभकारी है | इससे फेफड़े मजबूत बनते है | सुस्ती और
आलस्य दूर होते है | शरीर की लम्बाई बढती है | पाचन शक्ति बढती है | इसे करने के
लिए सीधे खड़े हो जाएं | अब दोनों हाथो को एक साथ एकदम सीधे ऊपर उठाते हुए सिर्फ
पैरो के पंजो के बल पर ऊपर की ओर उठे | अपने शरीर को जितना ऊपर की ओर खींच सकते है
उतना खीचने की कोशिश करें | पूरे शरीर का भार सिर्फ पैर के पंजो पर ही होना
चाहिए | एक मिनट तक इसी तरह रहने के बाद अपने हाथ नीचे कर ले |
वज्रासन
यह
आसन पीठ के दर्द और छाती के कष्टों को दूर करता है | इससे ध्यान को एकाग्र करने
में सहायता मिलती है | इसे खाना खाने के बाद भी किया जा सकता है | यह पाचन शक्ति
को बढाता है और खाने को ठीक से हजम कराता है | इसे करने के लिए दोनों पैरो को पीछे
की ओर मोडकर पैरो पर बेठ जाएं कमर सीधी रखे और गर्दन भी सीधी रहनी चाहिए | दोनों
हाथो को दोनों घुटनों पर रख लें | शुरू में यह आसन 5 मिनट तक करे | फिर इसे बढ़ाते हुए 15 मिनट तक कर सकते है |
पर्वतासन
यह
आसन फेफड़ो को मजबूत बनाकर साँस की बीमारियों को दूर करती है | इससे छाती चौड़ी होती
है और दिल निरोग बना रहता है | इस आसन के लिए पालती मारकर बेठ जाएं और दोनों पैरो
को एक दूसरे पर चड़ा लें | अब धीरे धीरे साँस खीचते हुए छाती को फुलायें और दोनों
हाथों को ऊपर की ओर उठा लें | कमर को एकदम सीधा रखें | एक मिनट तक ऐसे ही रहे |
फिर धीरे धीरे साँस को छोड़ते हुए हाथो को नीचे ले आयें और दस सेकंड तक आराम करें |
इस आसन को दस बार तक करना चाहिए |
त्रिकोणासन
यह
आसन बहतु सरल है | इसे करने से कमर दर्द नहीं होता है और मोसम बदलने से होने वाले
जुखाम, सर्दी, खांसी, आदि परेशानी को दूर करता है | इससे छाती चौड़ी होती है | इसे
करने के लिए सीधे खड़े हो जाये | दोनों पैरो के बीच थोड़ी दुरी रखे | अब कमर को
बांयी ओर झुकायें | इसके साथ ही दांये हाथ को सिर से सटाते हुए उसे भी बांयी ओर
झुका दें | अब बाँयें हाथ को खुटने से नीचे तक ले जाने का प्रयास करें | दस सेकंड
तक ऐसे ही रहे | फिर इसी तरह इस आसन को दांयी ओर झुकाकर करें |
अनुलोम
विलोम
यह
आसन अस्थमा में बहुत उपयोगी है | इससे फेफड़े मजबूत बनते है और दिमाग भी तेज काम
करता है | इससे स्मरण शक्ति बढती है | इस आसन को करने के लिए पालती मारकर
फर्श पर बेथ जाएं | अब अपने दाँये हाथ के अंगूठे से नाक के दाँये छेद को बंद करें
और बाँए नाक के छेद से साँस खींचे | अब दाँयें छेद से अंगूठे को हटा कर साँस छोड़े
| इसी तरह नाक के बांये तरफ से करें | ऐसा दोनों तरफ से दस दस बार करें |
में
उम्मीद करता हूँ की यह सब आसन करने से आपको जरुर लाभ होगा | यह पोस्ट आपको कैसी
लगी इसके बारे में मुझे comment में जरुर बताएं | अगर आपको यह अच्छी लगी हो तो इसे share भी कर दें, धन्यवाद|









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