कब्ज के लिए योग
कब्ज पेट से जुडी एक समस्या है| इससे पीड़ित व्यक्ति का पेट सही से साफ नहीं
होता है | पेट साफ नहीं होने से व्यक्ति का कही भी मन नहीं
लगता है और वो परेशान सा रहने लगता है | पेट सही से साफ नहीं
होने से पेट से जुडी अन्य बीमारियाँ लग जाती है और स्वास्थ्य भी गिरने लगता है| कब्ज से बचने के लिए योग करना चाहिए| योग करने से
पेट की कोई समस्या नहीं रहती है और पेट स्वस्थ रहता है | यहाँ
में कुछ कब्ज से बचने के लिए योगासनो के बारे में बताने जा रहा हूँ |
पेट के
बल लेटकर अपने दोनों हाथो को दोनों बगलों में फेला दे | फिर पेरो को घुटनों पर से मोडकर, फिर पेरो को घुटनों पर से मोड़कर हाथो से कसकर पकड़ ले | अब खूब गहरी साँस लेने के बाद अपनी गर्दन तथा सिर को सीधा करे और साँस को
रोखकर पेरो से पीछे की ओर खिचे| दोनों टखनों अथवा पेरो
के अंगूठो को दोनों हाथो से पकडे ही पेरो को जितना पीछे की ओर लेजा
सके लेजाए | हाथ बिलकुल सीधी सीधी तनी रहनी चाहिए | इस प्रकार आपके पेट पर ही पुरे शरीर का दवाब बढेगा और आप धनुरासन की
स्थिति में आ जायेंगे | इस स्थिति में 5 से 6 रहें| फिर धीरे
– धीरे साँस को छोड़ते हुए जमीन पर लोटें | अब पेरो को जमीन पर आने दे तथा हाथो को शरीर
के दोनों ओर फर्स पर ले जाकर आराम करे | ठोड़ी देर आराम के
बाद इसे फिर से करे | इस आसन को पहेले दो बार फिर चार बार तक
कर सकते है |
इस आसन
में पेट के बल फर्स पर सीधे लेट जाएं | अब दोनों हथेलियों को जमीन पर इस तरह जमाये कि वे कंधो के किनारे के ठीक
नीचे रहें | दोनों हाथो की उंगलियाँ मिली रहे तथा उनके आगे
के भाग कन्धों की रेखाओं के किनारे रहने चाहिए | दोनों
कुहनियां मुड़ी हुई तथा शरीर के बीच के भाग को छुती रहनी चाहिए | अब अपने पेरो की एडियों को आपस में मिलाये और उनके उनके अंगूठो को फर्स पर
सपाट रखते हुए, सर को सीधा कर, ठोड़ी को
जमीन पर रखे | फिर गर्दन और सिर को पीछे की ओर झुकाना शुरु
करे और सांस लेते हुए छाती को ऊपर की ओर उठाये | पेट को जमीन
पर और उसके एकदम पास ही रखना चाहिए | दोनों पैर पूरी तरह कड़े
बने रहने चाहिए ऊपर की ओर देखते हुए साँस को रोखे रहें, शरीर
को कड़ा बनाये रहें और दोनों कुहनियाँ मुड़ी हुई और धड़ के पास रहें | इस अवस्था में 6 से 8 सेकंड तक रहें | फिर
धीरे – धीरे सांस को छोड़ते हुए सिर को जमीन की ओर झुकाना
शुरु करे | जितनी देर में सिर जमीन को छुती रहे उतनी ही देर
में साँस छोड़ने की क्रिया भी पूरी हो जानी चाहिए | साँस
छोडते हुए पूर्वावस्था में लोटते समय शरीर को ढीला कर देना चाहिए | इसके बाद 6 से 8 सेकंड तक आराम करना चाहिए | इसी प्रकार हर चक्र को पूरा कर आराम लेते हुए इस अभ्यास को पांच बार
दुहराएं |
यह आसन
बहुत सरल है | इस आसन में पीठ
के बल फर्स पर सीधे लेट जायें | दोनों पैरों बराबर मिले रहे |
अब दांये घुटने ने मोडकर जांघ को पेट के साथ सतायें और दोनों हाथों
से दांये पैर को पकडकर उसे पेट की ओर अधिक से अधिक दबायें | बांया
पैर सामने की ओर फेला रहना चाहिए और बांया पैर मुड़ना नहीं चाहिए | दो मिनट तक इसी स्थिति में रहने के बाद, फिर इस आसन
को बांया पैर मोडकर करे | इस आसन को दोनों पेरो से 10
से 10 बार करे | इस आसन
से पेट की वायु खत्म होती है और पेट में कब्ज नहीं होती है |
वज्रासन
दोनों पेरो के घुटने मोडकर पीछे की ओर ले जाये| उनके तलवे आकाश की ओर उठे रहे | पैर का दांया अंगूठा बांये पैर के तलवे पर रहे और दोनों एडियाँ गुदा के नीचे रहे | घुटने बराबर मिले रहें| कमर का उपरी भाग तना रहे तथा गर्दन भी सीधी रहे | दोनों हाथो को दोनों घुटनों पर जमा लें | हाथो की उँगलियाँ भी मिली रहनी चाहिए | इस आसन को अधिक से अधिक 15 तक करे | इस आसन से ध्यान को एकाग्र करने में सहायता मिलती है| आसन को खाने के तुरंत बाद भी किया जा सकता है| यह पाचन शक्ति को बढाता है |
यह आसन
खड़े होकर किया जाता है| इसमें सीधे खड़े होकर| दोनों पाँवो को मिला ले |
अब दोनों हाथो को उपर ले जाये | अब साँस को
बाहर छोड़ते हुए हाथो सहित शरीर से कमर के उपर के भाग
को धीरे – धीरे सामने की ओर झुकाएं | अब
दोनों हाथो से दोनों पाँवो के अंगूठे पकड़ने का प्रयत्न करे, मगर
ऐसा करते समय घुटने मुड़ने नहीं चाहिए | फिर साँस को भीतर
खीचते हुए धीरे धीरे उपर आ जाये | इस आसन को 10 बार करना चाहिये | मोटे लोगो के लिए बिना
पैर मोडे यह आसन शुरु में कठिन लगता है | मगर कुछ दिनों के
प्रयास के बाद सफलता मिल जाती है |
उम्मीद करता हूँ कि
इन सभी योगासनों को करके आप कब्ज से मुक्ति पा सकते है | अगर आपका कोई सवाल या
सुझाव हो तो कृपया नीचे कमेंट में लिखे और इस लेख को अपने दोस्तों को शेयर करें,
धन्यवाद




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ReplyDeleteYeh sab yoga karne se mujhe kabj me bahut fayda hua hai
ReplyDeleteaap meri aur bhi post padiye aur swasth rahiye
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