सूर्य नमस्कार
सूर्यनमस्कार को
योगासनों की पहली सीढी कहा जा सकता है | इसमें अनेक योगासन मिल जाते है | इससे
अनेक तरह के लाभ मिलते है | जो लोग योगासन न कर सके वो सिर्फ सूर्यनमस्कार करके
लाभ ले सकते है | सूर्यनमस्कार को सुबह सबसे पहले करना चाहिए | बहुत लोग
सूर्यनमस्कार करते है मगर वो इसे करने का सही तरीका नहीं जानते है | में यहाँ
सूर्यनमस्कार की 12 क्रियाओ को सही तरीके से करने के बारे में बताने जा रहा हूँ
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पहली स्थिति – सूर्य
की ओर मुँह करके हाथ जोडकर खड़े हो जाएं | दोनों पैर मिले रहने चाहिए | अब
प्रार्थना करने की तरह हाथ जोडले |
दूसरी स्थिति – गहरी
साँस लेते हुए दोनों हाथो को दोनों कंधो के ऊपर उठाते हुए अधिक से अधिक ऊपर ले
जाएं | इस स्थति में दोनों हथेलियाँ सीधी खुली और उनकी उँगलियाँ मिली रहनी चाहिए |
अब शरीर में पूरा तनाव रखते हुए पीछे की और झुकने की कोशिश करनी चाहिए |
तीसरी स्थिति – अब
दोनों हाथो को सामने की ओर धीरे – धीरे साँस छोड़ते हुए नीचे लाएं और हाथो की
अंगुलियों से पैरो की अंगुलियों को छुने की किशिश करें | ऐसा करते समय घुटने मुड़ने
नहीं चाहिए |
चौथी स्थिति – अब
साँस लेते हुए बांये पैर को आगे ले जाये और दांया पैर पीछे की ओर तना रहे | शरीर
का पूरा भार दोनों हाथो के पंजो पर रहना चाहिए | फिर पीठ को थोडी नीचे दबाकर दांये
पैर के घुटने और पंजे से जमीन को छुए |
पांचवी स्थिति – इस
स्थिति में दोनों हाथो को सिर के सामने की ओर जमीं पर रखें | अंगुलियाँ बाहर की ओर
रहें | अब अपनी कमर को अधिक से अधिक ऊँचा उठाने का प्रयास करें | मगर धड़ में कड़ापन
बना रहे और खुटने झुकने ण पाएं |
छठी स्थिति – हाथों
के बल पूरे शरीर का भार लेते हुए कुहनियों को मोड़े | इस स्थिति में पूरे शरीर और
दोनों हाथो के पंजे जमीन को छुंगे मगर कोहनियाँ उपर उठी रहे | हाथो से पंजो से
लेकर कोहनियाँ तक का भाग तना हुआ रहना चाहिए | इस स्थिति में साँस को पूरी तरह छोड़
दें |
सातवी स्थिति – छाती
से सिर तक के भाग को उपर उठायें | शरीर का भार दोनों हाथो पर रहना चाहिए | दोनों
हथेलियाँ समान अंतर पर जमीं पर रहे और उनसे ऊपर कन्धों तक बाहें तनी रहनी चाहिए |
इस स्थिति में साँस भरते हुए सीना और गर्दन को ऊपर उठाकर देखना चाहिए |
आठवी स्थिति – यह
स्थिति पांचवी स्थिति की तरह ही है | साँस
को धीरे धीरे बाहर छोड़ते हुए दोनों पैरो को पीछे ले जाये| दोनों पेरो की एडियाँ
मिली रहनी चाहिए | पीछे की ओर शरीर को खिचाव दें और एडियों को जमीन पर मिलाने का
प्रयास करें | कमर को अधिक से अधिक उठाये | गर्दन को नीचे की और झुकाकर रखे |
नौवी स्थिति – यह स्थिति
चौथी स्थिति की तरह है मगर इसमें दांये पैर को आगे ले जाकर बांया पैर पीछे की ओर तना
रहता है | शरीर का पूरा भार दोनों हाथो के पंजो पर रहना चाहिए | फिर पीठ को थोडी
नीचे दबाकर बांये पैर के घुटने और पंजे से जमीन को छुए |
दसवी स्थिति – इस
स्थिति में तीसरी स्थिति की तरह ही दोनों हाथो को सामने की ओर धीरे – धीरे साँस
छोड़ते हुए नीचे लाएं और हाथो की अंगुलियों से पैरो की अंगुलियों को छुने की किशिश
करें | ऐसा करते समय घुटने मुड़ने नहीं चाहिए |
ग्यारहवी स्थिति - इस
स्थिति में दूसरी स्थिति की तरह ही गहरी साँस लेते हुए दोनों हाथो को दोनों कंधो
के ऊपर उठाते हुए अधिक से अधिक ऊपर ले जाएं | इस स्थति में दोनों हथेलियाँ सीधी
खुली और उनकी उँगलियाँ मिली रहनी चाहिए | अब शरीर में पूरा तनाव रखते हुए पीछे की
और झुकने की कोशिश करनी चाहिए |
बारह्बी स्थिति –
इसमें पहली स्थिति की तरह ही सूर्य की ओर मुँह करके हाथ जोडकर खड़े हो जाते है |
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